Tuesday, 21 November 2017
सरितप्रवाह कृति: तानाशाह
सरितप्रवाह कृति: तानाशाह: तानाशाही बारूद के ढेर पर बैठकर दूसरों को धमकाना। जंग के इरादे से , दूसरों को भय दिखाना। खुद का तानाशाह दिखाकर , प...
सरितप्रवाह कृति: तानाशाह
सरितप्रवाह कृति: तानाशाह: तानाशाही बारूद के ढेर पर बैठकर दूसरों को धमकाना। जंग के इरादे से , दूसरों को भय दिखाना। खुद का तानाशाह दिखाकर , प...
तानाशाह
तानाशाही
बारूद के ढेर पर बैठकर
दूसरों को धमकाना।
जंग के इरादे से,
दूसरों को भय दिखाना।
खुद का तानाशाह दिखाकर,
परमाणु परीक्षण करना।
आरजू है उन ताकतवर देशों के,
श्रेणी मे अव्वल रहना।
भयंकर रेडियो किरणों से,
पर्यावरण प्रदूषित करना।
तानाशाह का झंडा गारकर,
जंग का इरादा रखना।
बड़ा नागवार है यह हरकत,
तानाशाही राजा का।
बारूद तो आखिर बारूद है,
रच रहा है खुद ही मुसीबत,
कुछ हद तक शुरुआत है यह।
दफन हो गई असंख्य जाने,
परीक्षण निमित्त सुरंग के अंदर।
अब भी समझ जो आ जाए तो,
कदम मोर लेना बेहतर।
तबाही का कारण न बन जाए,
इनकी यह सनकी हरकत।
दफन न हो जाए इनकी सल्तनत,
बारूदी बवंडरों के अंदर।
सरिता प्रसाद
Tuesday, 31 October 2017
श्रीमती इन्दिरा गाँधी
श्रीमती इंदिरा गाँधी
वो फौलादी इरादे,
वो देश के निमित्त,
सर्वस्व न्योछावर कर,
अपने देश के स्वाभिमान के,
रक्षक बनकर,
हर महत्वपूर्ण निर्णय लेकर,
देश हित कर्तव्यनिष्ठ,
हर सवाल का सटीक जबाब देकर,
हर तूफानों के आगे,
अडिग रहकर अपने,
मजबूत इरादे और,
लबालब हिम्मत के बल पर,
टूटकर परिस्थितियों के आगे,
फिर से खड़ा होना मजबूत बनकर,
वो भरपूर साहस और विश्वास,
के आधार पर फिर से,
जीत का परचम लहराना।
जिसने अपना सर्वस्व न्योछावर कर,
देश के मस्तक को कभी,
किसी और के आगे झुकने न दिया,
वही तो थी हमारी,
देश की पहली महिला प्रधानमंत्री।
-सरिता प्रसाद-
Friday, 27 October 2017
प्यार और एकता का प्रतीक छठ वर्त
प्यार और एकता काप्रतीक छठ पर्व
रिश्तों के सुगंधों
से सुगंधित,
प्यार के रसों से
सराबोर ,
एकता के अद्भुत डोर
मे बंधा,
ईश्वरिए कृपा से ओत –
प्रोत,
आस्था और भक्ति में
लीन,
एक विशाल जन समुदाय,
आखिर कहाँ जा रहा है?
क्या कोई हीरा मोती,
या कोई धन संपदा,
प्राप्त करने जा रहा
है।
नहीं – नहीं कुछ भी
नहीं,
यह तो सूर्य देव की
अद्भुत शक्ति है,
जो पहली किरण के रूप
में,
एक विशाल जन समुदाय
को,
अपनी ओर खिंच रहा है।
प्यार और एकता के डोर
में बंधे,
त्रिदिवसीय उपासक
इश्वरिए भक्ति में लीन,
प्रभु कि एक कृपा एक
दरश पाने हेतु,
एक विशाल जन समुदाय
गंगा तट पर,
अस्ताचलगामी उदयगामी
सूर्य के अद्भुत दर्शन कर,
छठ माता स्वरूप ईश्वर
को अर्घ्य चढ़ाने जा रहा है।
उस महान प्रभु के
कृपा से कृत –कृत होकर
एक विशाल जन समुदाय
प्रेम और एकता के प्रतीक,
इस महान शुद्ध
सात्विक त्योहार पर अपने परिवार,
के शुभ कामनाओं के
साथ सारे भेद - भाव छोड़कर
प्रेम और एकता के डोर
मे बंधने जा रहा है ।
सरिता प्रसाद
Thursday, 14 September 2017
साधु या ढोंगी
साधु या
ढोंगी
साधु संत का चोला पहनकर,
धर्म का आडम्बर रचनेवाले।
धर्म की आर में छुपकर,
भ्रष्ट कर्म करने वाले ।
ढोंगी जो देश का कलंक है,
भोली - भाली जनता को,
बरगलाकर मीठी बोल बोलकर,
धर्म रूपी नकाब पहनाकर,
उनके भावनाओं से खेलनेवाले।
जनता के द्वारा दिये हुए पैसे से,
जनता को ठगकर राज करनेवाले।
जनता के वक्त भावनाओं और,
उनके पैसों से खेलने वाले।
धर्म के नाम पर अपनी सुरक्षा हेतु,
विरोधी फौज खड़ी करनेवाले।
देश में अराजकता फैलानेवाले।
अपने ऐशो आराम अपने शौक हेतु,
चेहरे पर धर्म रूपी मुखौटे लगाकर,
भोली – भाली जनता को ठगनेवाले।
बनते हैं धर्मनिष्ठ अंत:पुर को,
भगवान का गृह बताकर,
भगवान के रूप का ढोंग रचाकर,
नारियों के अस्मत से खेलनेवाले।
इस देश में रहकर बहू बेटियों पर,
अपनी बुरी निगाह रखने वाले ।
धर्म के नाम को बदनाम करनेवाले।
देश से ऐसे दरिंदों का खात्मा करना
होगा ।
इनको इनके किए का सजा भुगतना होगा ।
तभी हमारे देश से ऐसे अराजक तत्वों
का,
पूर्ण रुपेऐसे कचड़ों का सफाया कर,
देश सही रूप से,
स्वच्छता अभियान में सफल होगा।
सरिता प्रसाद
--------------
Subscribe to:
Posts (Atom)