Wednesday, 3 January 2018

न्याय व्यवस्था

न्याय व्यवस्था 


ये कैसी न्याय व्यवस्था है
जहाँ दुराचारी बेलगाम घूम रहे हैं
दुष्प्रवृतियों की बेइन्तहाँ हो गई है
असुरक्षा जहाँ घर कर गई है
जहाँ आतताई दिन दहाड़े
गोली बारी कर रहे हैं
ये कैसी न्याय व्यवस्था है
मनचले खुलेआम मनमानी कर रहे हैं
न कोई रोक है न कोई टोक है ...
जहाँ हर नारी असुरक्षित है
जहाँ प्रत्येक स्त्री ही भयग्रस्त है
ये कैसी न्याय व्यवस्था है
स्वतंत्रा सिर्फ नाम की रह गई है
नारी को अबला समझ
कभी इस गली कभी उस शहर
उसके अस्मत से खेल
उसकी हत्या भी कर रहे हैं
ये कैसी न्याय व्यवस्था है
श्री कृस्ण राम की नगरी में
जहाँ नारी का सम्मान नहीं
उस ऋषि  मुनियों कि भूमि के
सम्मान का जाने क्या होगा
 वेदों के ज्ञान से सिंचित
इस देश का जाने क्या होगा
उस आने वाले नव सृजन के
स्वर्णिम भविष्य का जाने क्या होगा
ये  कैसी न्याय व्यवस्था है
सरिता प्रसाद

Wednesday, 6 December 2017

सरितप्रवाह कृति: श्रद्धांजलि

सरितप्रवाह कृति: श्रद्धांजलि: श्रद्धांजलि जीते तो  हैं सभी अपने लिए अपनों के लिए ज़िंदगी उन्ही कि मुकम्मल ...

श्रद्धांजलि

श्रद्धांजलि


जीते तो  हैं सभी
अपने लिए अपनों के लिए
ज़िंदगी उन्ही कि मुकम्मल होती है
जो कुछ पल जीते हैं औरों के लिए
लम्हा निकल जाता है ज़िंदगी का
यूँ ही चलते सोचते
लम्हा ज़िंदगी का मुकम्मल होता है उन्ही का
जो कुछ पल सोचते हैं औरों के लिए
जो चार कदम चलते हैं औरों के लिए
धड़कते हैं दिल सभी के अपनों के लिए
विरले ही होते हैं वो जिनके सीने में
धड़कते हैं दिल औरों के लिए
यादों में सजते हैं वो
जहां से चले जाने के बाद
जुबां पर नाम होता है उन्ही का
रुखसती  पाने के बाद
सरिता प्रसाद





Wednesday, 29 November 2017



इलेक्शन
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आज हमारे देश का,
फिर से माहौल गरमाया है
क्योंकि इलेक्शन आया है
छुपकर बैठा था जो म्यानों मे
निकलकर बाहर आया है,
धूल पड़ी थी जिन वादों पर।
झाड़ पोछ चमकाया है
फिर से इलेक्शन आया है
कसमों वादों की लड़ी लगी है
नए- नए लोलुपों से
सारा बाजार ही छाया है
उसी राज्य में उन्होने अपना घर बनाया है
आज वही इलेक्शन आया है
पार्टियों ने एक दूसरे पर
शब्दों के बाण चलाया है
हर जीत के रणनीतियों ने
सबका मन भरमाया है
आज फिर से इलेक्शन आया है
जनता बेचारी परेशान है
इनके मतलबी इरादों से
किस पर विश्वास,अविश्वास करे यह
बड़ा ही असमंजस छाया है
देखो फिर से इलेक्शन आया है

सरिता प्रसाद

Tuesday, 21 November 2017

सरितप्रवाह कृति: तानाशाह

सरितप्रवाह कृति: तानाशाह: तानाशाही बारूद के ढेर पर बैठकर दूसरों को धमकाना।  जंग के इरादे से , दूसरों को भय दिखाना।  खुद का तानाशाह दिखाकर , प...

सरितप्रवाह कृति: तानाशाह

सरितप्रवाह कृति: तानाशाह: तानाशाही बारूद के ढेर पर बैठकर दूसरों को धमकाना।  जंग के इरादे से , दूसरों को भय दिखाना।  खुद का तानाशाह दिखाकर , प...

तानाशाह

तानाशाही



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बारूद के ढेर पर बैठकर
दूसरों को धमकाना। 
जंग के इरादे से,
दूसरों को भय दिखाना। 
खुद का तानाशाह दिखाकर,
परमाणु परीक्षण करना। 
आरजू है उन ताकतवर देशों के,
श्रेणी मे अव्वल रहना।  
भयंकर रेडियो किरणों से,
पर्यावरण प्रदूषित करना। 
तानाशाह का झंडा गारकर,
जंग का इरादा रखना। 
बड़ा नागवार है यह हरकत,
तानाशाही राजा का। 
बारूद तो आखिर बारूद है,
रच रहा है खुद ही मुसीबत,  
कुछ हद तक शुरुआत है यह। 
दफन हो गई असंख्य जाने,
परीक्षण निमित्त सुरंग के अंदर। 
अब भी समझ जो आ जाए तो,
कदम मोर लेना बेहतर। 
तबाही का कारण न बन जाए,
इनकी यह सनकी हरकत। 
दफन न हो जाए इनकी सल्तनत, 
बारूदी बवंडरों के अंदर। 
सरिता प्रसाद