Thursday, 6 April 2017
Wednesday, 15 March 2017
राजनीति
आज कल राजनीति की हवा बह रही है
इलैक्शन का मौसम चल रहा है
सभी प्रत्याशी अपने-अपने हथकंडे लेकर
राजनीति के अखाड़े मे उतर गए हैं
जो पहले से नेता थे वो तो है ही
उनके रिस्ते नाते भी मैदान मे कुद पड़े हैं
परिवार का माहौल ही राजनीति भड़ा है
अपने अपने हाथों में चिन्ह लिए खड़े है
संतान तो संतान नई नवेली दुल्हन को भी
मैदान में खिच खड़े किए है
अपने अपनों से दूर हो गए है
जो दुश्मन था वो दोस्त बन गए हैं
अपने अपनों को अपनी ओर खिच रहे है
पर अपने ही अपनों से दूर भाग रहे हैं
जो कुर्सी पर पहले से बैठा है
कुर्सी बचाने के लिए और और कर रहा है
होर लगी है सभी को कुर्सी की
सभी एक दूसरे की टांग खिच रहे है
सीधे साधे लोगों को भी नहीं
छोड़ रहे है
एक दूसरे की छवि बिगाड़ने मे लगे हैं
जनता परेशान है देखकर इनकी उठा पटक
किधर जाए किसे वोट दे तय नहीं कर पा रही है
कौन कितना कारगर है पहचानना है मुश्किल
कसौटी पर कौन खड़ा उतड़ेगा समझना है मुश्किल
आजकल राजनीति की हवा बह रही है ।
सरिता प्रासद
Saturday, 4 February 2017
आशा की किरण
आशा
की किरण:
निराश
न करना इनको
तुझसे
बहुत आश लगाए बैठे है
जले
हुए है परिस्थितियों के
जुझते
चले आ रहे हैं।
बेवफाइयों
के जहर पीकर
किसी
प्रकार ज़िंदा है ये
तु
ही आशा की किरण हो
तुझ
पर ही आश लगाए बैठे हैं।
चिराग
जला दो अँधियारों मे
दूर
भगा दो अँधियारों को
सिसकती
साँसो को राहत दे दो
बैठे
हो सरताज लगाए हुए
बहुत
जिम्मेदारियाँ निभानी है
तुझे
देश
की नईया मझधार में है
इसे
बचाकर पार लगानी है तुझे
अँधियारों
को दूर कर उजियारा लानी है
तुझे
इस
देश को बचानी है तुझे
ताज
की लाज निभानी है तुझे ।
सरिता
प्रसाद
04-02-2017
Thursday, 19 January 2017
गणतंत्र दिवस
गणतंत्र दिवस

चलो
उठो वीरो जवानों,
आज फिर से वो दिन आया है,
आज फिर से वो दिन आया है,
आज
फिर से तिरंगा लहराया है ।
नव
शुर जग में छाया है,
आज
फिर से तिरंगा लहराया है ।
आजादी
का मूल मंत्र को,
हर
जन-जन
को समझाना है ।
देश
हमारा सारे जहाँ से न्यारा
है,
नई
सोच और नया सवेरा,
इस धरती पर लाना है ।
इस धरती पर लाना है ।
नई
सोच और नई दिशा,
से ईंट से ईंट सजायेंगे,
से ईंट से ईंट सजायेंगे,
फिर
से हम देश को अपने,
सोने की चिड़ियाँ बनायेंगे ।
सोने की चिड़ियाँ बनायेंगे ।
आतंको
को धूल चटाकर,
भ्रष्टाचार मिटाना है,
भ्रष्टाचार मिटाना है,
बेरोजगारी
और
अशिक्षा,
मिटाकर गरीबी मिटाना है ।
मिटाकर गरीबी मिटाना है ।
भारत
की इस माँ बहनों का,
मिलकर लाज बचाना है,
मिलकर लाज बचाना है,
शांति
और सुरक्षा
का,
सुंदर साम्राज्य बसाना है ।
सुंदर साम्राज्य बसाना है ।
देश
की खातिर जान लुटाने,
सरहद पर है जवान खरे,
सरहद पर है जवान खरे,
क्यों
न हम इस देश के अंदर,
इन जैसा ही कर्म करें ।
इन जैसा ही कर्म करें ।
श्वेत
रंग सी शांति होगी,
केशरिया सा दमकेगा,
केशरिया सा दमकेगा,
हरियाली
सी खुशियाँ होगी,
जैसे खेत लहराता है ।
जैसे खेत लहराता है ।
चलो
उठो वीरो जवानों,
आज फिर से वो दिन आया है,
आज फिर से वो दिन आया है,
आज
फिर से तिरंगा लहराया है ।
सरिता
प्रसाद
सुनहरी यादें
सुनहरी यादें
आज
फिर खिड़कियों
के झरोखों
से
चहचहाट
सी सुनाई दी मेरे कानों
में
शायद
सच है कोई है
सपना
कहीं
बर्तनों की खनक
गुनगुना
गई मेरे कानों
में
कानों
का धोखा था
या
किसी के आने का इंतजार
कभी
झुरमुठ सी
पेड़ पौधे यहाँ हुआ करते थे
उनकी
डालों पर खग -
विगह कलरव
करते थे
कट
गए सारे के सारे झुरमुठ
रह
गए बनते
भवनों की खटपट
अब
तो यहाँ सन्नाटा है
बस
ईंट पत्थरों का बसेरा है
जान
कहाँ बेजान है यह
बस
बसते शहरों की शान है यह
जान
तो उन झुरमुठों
में समाया करते
थे
जब
वहाँ खग -
विगह चहचहाया
करते थे
आज
भी उनकी याद आती है
फ़िजा
में सरगम सी
लहराती है
मन
का उपवन हरा भरा हो जाता है
वातावरण
भी यहाँ का मनोरम हो जाता है
सुबह
की धूप उनकी सरगम
सुन उगा करती थी
शाम
उनकी सरगम सुन डूबा करती थी
अब
तो बस सन्नाटा पसरा है
कब
सुबह हुई कब शाम कहाँ पता चलता
है
आज
फिर से खिड़कियों
के झरोखों से
चहचहाहट
सी सुनाई दी मेरे कानों में।
सरिता प्रसाद
20-01-2017
Tuesday, 3 January 2017
सुनहरी उड़ान
सुनहरी
उड़ान
_________
सुनहरे
पंखो वाली तितली,
तुझे
उड़ने की चाह है।
अनगिनत
अनजाने राह में,
तुझे
खिलने की चाह है।
तु
परिंदा मनचली हो,
सुहाने
सपने बुनने की चाह है।
उड़
जा उड़ती रहना नील गगन में,
तेरा
रंग बिखरा है जहान में,
तुझे
रंग में रगने की चाह है।
जा
जा चूम ले गगन को ,
हवाओं
में झूमने की चाह है।
सुनहरी
राहें राह देख रही तेरी,
तुझे
तेरी मंजिल पाने की चाह है।
सिंघासन
पुकार रहा है तुझे,
कब
से तुझे इसे पाने की चाह है।
वक्त
आया है तेरा तुझे बस ,
सुनहरे
पंखो से उड़ान भरने का इंतजार
है।
सरिता
प्रसाद
03-01-2017
Sunday, 1 January 2017
नव वर्ष की लालिमा
नव वर्ष की लालिमा संग
हर घर स्वर्णिम सुमन खिले
खुशियों की बाहर हो
हर मन - उपवन सुमन खिले
हर सपना साकार हो
खुशियों का भंडार मिले
हर रिश्तों का रंग चटक हो
एकता का भाव जगे
प्यार जगे जन - जन के मन में
एक सुंदर संसार सजे
आतंकों का नाश हो
शांति और सद्भाव जगे
देश हमारा सुंदर उपवन हो
जहां हर खुशियों के फूल खिले
बेईमानी और भ्रष्टाचार के अंत से
बेरोजगारी और अशिक्षा के विनाश से
स्वर्णिम किरणों का उदय हो
शिक्षा के शृंगार से
नव युग का नव निर्माण हो
सुख शांति चहुंओर व्याप्त हो
नव वर्ष की लालिमा संग
देश का नव निर्माण हो
सरिता प्रसाद
01.01.2017
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