Tuesday, 5 June 2018
रचनाकार: सरिता प्रसाद की कविताएँ
रचनाकार: सरिता प्रसाद की कविताएँ: कविताएँ सरिता प्रसाद मर्द का दर्द रोज रोज की भागा दौड़ी नए नए है प्रतिस्पर्धाएँ तय सीमाएँ और काम के बोझ तले दबती जाती है ये जिन्दगी बेचारा आख...
Friday, 13 April 2018
सरितप्रवाह कृति: हैवानियत की हद हैवानियत की हद हो गई है इंसान की...
सरितप्रवाह कृति:
हैवानियत की हद
हैवानियत की हद हो गई है इंसान की...: हैवानियत की हद हैवानियत की हद हो गई है इंसान की इंसानियत हाय किस कदर गिर गई है नारी के नाम से ही जैसे आँखों पर पट्टी बंध गई...
हैवानियत की हद
हैवानियत की हद हो गई है इंसान की...: हैवानियत की हद हैवानियत की हद हो गई है इंसान की इंसानियत हाय किस कदर गिर गई है नारी के नाम से ही जैसे आँखों पर पट्टी बंध गई...
हैवानियत की हद
हैवानियत की हद हो गई है
इंसान की इंसानियत
हाय किस कदर गिर गई है
नारी के नाम से ही जैसे
आँखों पर पट्टी बंध गई है
दिल और दिमाग पर ताले लग गए हैं
क्या छोटी हो क्या हो बड़ी
वहशियत की आग
सभी को जला रही है
कैसे निष्ठुर निर्लज प्रवृति है यह
इनकी हैवानियत के हत्थे
मासूमों की आबरू चढ़ रही है
सुना था कभी राक्षसी प्रवृति हुआ करती थी
आज सचमुच साक्षात्कार हो रही है
क्या कसूर था उन मासूमों का
क्या दुनिया में आना ही
मरना ही था आबरू लेकर लुटी हुई
तो इस दुनिया में ही क्यों आती
कोई उनकी भी तो सपने होंगे
कोई उनकी भी तो अरमा होगी
डर लगता है सोच उस दिन को
कहीं ऐसा न हो जाए
एक दिन धरती फट जाए
उस दिन सीता मैया की तरह
नारी जाती भी धरती में समा जाए
आखिर कब तक दर्द सहती रहेगी
कब तक इस आग में जलती रहेगी
अच्छा हो की वक्त से पहले
ही सब कुछ संभल जाए
वरना यह डर व्याप्त है दिल में
वो दिन फिर न लौट आए
सरिता प्रसाद
Tuesday, 3 April 2018
राम राज्य
राम
राज्य
ऐ काश
अपने देश में
ऐसा
साम्राज्य होता
जैसे राम
राज्य होता
सुख
शान्ति व्याप्त होती
जनता यहाँ
खुश होती
सुशासन
सुव्यवस्था से
हर समस्या
का अंत होता
न
बेरोजगारी होती
न ही
भ्रष्टाचार होता
जब जनता
सुखी होती
तो न लूट
मार होता
आदर्श राज
पाट का
जनता पर असर
होता
सबकुछ
व्यवस्थित होता
विकास सही
होता
न नारी
अपमानित होती
न ही बलात्कारी होते
निस्वार्थ
सेवा भाव तब
जन –जन
में व्याप्त होता
न कुर्सी
की खिचा तानी
न नेताओं
की मनमानी
राजनीति
दाव – पेंच का
न बोल - बाला
होता
जब तृप्त
होगी जनता
तो अपराध
कैसे होगा
ऐ काश
अपने देश में
ऐसा
साम्राज्य होता
जैसे राम
राज्य होता
सरिता
प्रसाद
Tuesday, 20 March 2018
सरितप्रवाह कृति: जीतखेल कर धुंवाधारजड़ कर चौके छक्केपहुँचा दिया जीत...
सरितप्रवाह कृति: जीत
खेल कर धुंवाधारजड़ कर चौके छक्केपहुँचा दिया जीत...: जीत खेल कर धुंवाधार जड़ कर चौके छक्के पहुँचा दिया जीत के मुकाम पर रह गए सभी हक्के –बक्के चल यूँ ही चला चल बनकर प्रतिस्पर्धी...
खेल कर धुंवाधारजड़ कर चौके छक्केपहुँचा दिया जीत...: जीत खेल कर धुंवाधार जड़ कर चौके छक्के पहुँचा दिया जीत के मुकाम पर रह गए सभी हक्के –बक्के चल यूँ ही चला चल बनकर प्रतिस्पर्धी...
जीत
खेल कर धुंवाधार
जड़ कर चौके छक्के
पहुँचा दिया जीत के मुकाम पर
रह गए सभी हक्के –बक्के
चल यूँ ही चला चल
बनकर प्रतिस्पर्धी देश का
करता रह सीना चौरा
तू अपने भारत देश का
न पिछड़ेगा कभी भारत हमारा
भले ही लड़खड़ा जाए कभी
गिरकर संभलना सीखा है इसने
हर बिषम परिस्थितियों मे
जीत का परचम लाहड़ाता रहेगा
मान देश का बढ़ाता रहेगा
सरिता प्रसाद
Saturday, 17 March 2018
नारी
नारी
सृष्टि का आधार तत्व जो
ममत्व का भंडार है जो
उत्पति का मूल तत्व जो
आधा है वो है पूरक
सृष्टि के संरचना का
जिसके छत्रछांव में फलता-फूलता
विश्व का है हर एक परिवार
बिन इसके सृष्टि का अस्तित्व नही
न ही इसके है संसार
हरे - भरे बगिया के फूल जो
वन उपवन का सुगंध है जो
शक्ति स्वरूपा दुर्गा काली
सरस्वती लक्ष्मी का स्वरूप
ममतामई जननी है जो
भिन्न - भिन्न है इसके स्वरूप
कहीं संगिनी कहीं सलाहकार
कहीं मित्रवत इसके रूप
मूल शक्ति है मूल तत्व जो
सृष्टि के संतुलन का
त्यागशील संतोष सहिष्णुता
संयम सृजनशील स्नेहमई
इन शब्दों की सार्थकता जिससे
यही नारी का है मूल स्वरूप
नमन ईश्वरीय संरचना को
सृष्टि का है जो आधारभूत
सरिता प्रसाद
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